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डॉ. अंशुमन जैन ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को लिखा पत्र, कहा- जांच नहीं लॉकडाउन है कोरोना से बचाव का उपाय

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बिलासपुर। शहर के प्रसिद्ध होमियोपैथी चिकित्सक डॉ. अंशुमन जैन का कहना है कि कोरोना से बचाव का सबसे कारगर उपाय लाकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग है। छत्तीसगढ़ में कोरोना काबू पर है तो इसी वजह से है। सबकी जांच की मांग की जा रही है। यह एक तरह से ठीक तो है मगर पॉजीटिव आने के बाद भय का माहौल निर्मित होगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा कोरोना को लेकर अब तक उठाए गए कदम को सराहनीय बताते हुए एक खुला पत्र डॉ. जैन ने मुख्यमंत्री के नाम लिखा है। जिसे हम ज्यों का त्यों दे रहे हैं।


माननीय मुख्यमंत्री महोदय मैं पेशे से डॉक्टर हूं और आपके द्वारा कोविड-19 कोरोनावायरस के लिए उठाए गए सारे कदम बहुत ही सराहनीय है।

जैसा कि कटघोरा में एक साथ 8 केसेस पॉजिटिव आए हैं इसे देखते हुए यह तो समझ में आ रहा है कि छत्तीसगढ़ में बहुत सारे nonsymptoic cases होंगे।

आज तक के एक कार्यक्रम में विश्व के प्रसिद्ध डॉक्टर केके अग्रवाल की एक वक्तव्य में मैंने सुना कि अब हम भविष्य में जितनी जांच करेंगे उतने ज्यादा पॉजिटिव के साथ आने की संभावना है यह बॉडी के एंटी बॉडी बन जाने पर निर्भर करता है मेरा आपसे निवेदन है जांच बचाव का एक रूप हो सकता है किंतु नॉन सिंप्टोमेटिक केसेस जैसा कि अभी चाइना में फिर से आ रहा है और ज्यादा बढ़ जाएंगे।

मालूम हो कि यह जानने के बाद कि व्यक्ति पॉजिटिव है डेथ फीयर कनफ्लिक्ट death fear conflict पैदा करता है जो lungs disease create करने के लिए शरीर का एक डिफेंस मेकैनिज्म है यह कनफ्लिक्ट एक ऐसा ही कनफ्लिक्ट है जैसा कि कैंसर के पेशेंट को बता दिया जाए कि उसे कैंसर है तो उसकी आयु तत्काल प्रभाव से दूसरे दिन से ही कम होने लगती है वह अपने जीवन के प्रति उत्साह कम होने लगता है और बीमारी में गिरता चला जाता है।

इस बीमारी का सर्वोत्तम उपाय कंप्लीट lock down है उदाहरण के तौर पर अगर किसी घर पर 10 व्यक्ति रहते हैं और सभी non symptomatic पॉजिटिव हैं तो भी वह 8 से 10 दिन के अंदर पूरी तरह रिकवर हो जाएंगे और अगर उस में से किसी एक व्यक्ति को सिम्टम्स बढ़ते भी हैं तो हम उनकी जांच करके उन्हें अलग से क्वॉरेंटाइन कर सकते हैं और इलाज कर सकते हैं किंतु अगर 10 के 10 व्यक्ति को यह बता दिया जाए जांच में यह पता चले कि वह सभी पॉजिटिव है तो मृत्यु दर बढ़ जाएगी और पॉजिटिव संख्या बढ़ने से भी बाकी लोगों में डेथ कनफ्लिक्ट हो सकता है।

जितनी ज्यादा जांच उतनी ज्यादा मरीज हम छत्तीसगढ़ में बहुत बेहतर स्थिति पर है और अगर सिर्फ लॉक डाउन पर ध्यान दिया जाए सिंप्टोमेटिक पेशेंट की ही जांच की जाए तो हम मन शरीर और रोग प्रतिरोधक क्षमता से इस बीमारी से जीत सकते हैं आपका निर्णय हमेशा सर्वोत्तम रहा है उम्मीद है इस पूरी बात को अपने सुपीरियर मेडिकल स्पेशलिस्ट से डिस्कस कर अच्छा निर्णय लेंगे।

धन्यवाद.

©डॉ अंशुमन जैन, होम्योपैथिक चिकित्सक व काउंसलर, बिलासपुर, छत्तीसगढ़

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