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अब मकान में बिल्ला लगाने का फर्जीवाड़ा आया सामने

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जनपद पंचायत ने पहले दिया आदेश फिर किया निरस्त ।
सीईओ ने कहा एसडीएम कार्यालय के आधार पर आदेश जारी किया गया था ।
पूर्व जनपद सदस्य ने रोका अपने पंचायत में काम ।

 

दबंग न्यूज लाईव
सोमवार 09.03.2020

कोटा – लोगों को लूटने वालों और बेवकूफ बनाने वालों की कमी अपनेे देश में तो है ही नहीं । हर दिन नई नई तरकीब लोगों को लूटने की ये लोग बनाते हैं । और इनके झांसे में गांव के लोग क्या बड़े अधिकारी भी आ जाते हैं ।
ऐसा ही कारनामा कोटा जनपद के पंचायतों में चल रहा है । कोटा जनपद से दो मार्च बीस को एक आदेश अपने सभी पंचायतों के लिए निकला जिसमें स्पष्ट कहा गया कि एसडीएम के पत्र के संदर्भ में ये पत्र जारी किया जा रहा है कि मकान में नम्बर प्लेट लगवाना है जिसमें स्वच्छता है वहां स्वच्छ भारत स्वच्छ छत्तीसगढ़ का नारा अंकित है । इसे हर मकान में लगाना सुनिश्चित किया जावे इसके लिए बकायदा तीस रूपए भी मकान मालिक द्वारा दिया जावेगा । पंचायत इसे करवाने में नियमानुसार कार्यवाही करें और सहयोग प्रदान करें ।


इस आदेश के निकलने के चंद घंटो बाद ही आदेश को निरस्त करने का भी आदेश जनपद पंचायत ने निकाल दिया कि जो बिल्ला लगाने का आदेश पारित किया गया था उसे निरस्त किया जाता है । अब आप इस संबंध में कोई कार्यवाही ना करें और ना ही इस कार्य में लगे लोगों को किसी भी स्तर पर सहयोग प्रदान करें ।
यहां तक तो मामला ठीक है लेकिन सवाल ये नहीं है कि पंचायतों में बिल्ला लगाया जा रहा है और कुछ लोग गांव वालों को बेवकुफ बनाकर पैसे वसूल रहे है। ।गंभीर मामला ये है कि उच्च अधिकारियों ने बिना किसी जांच पड़ताल के कैसे इस कार्य की अनुमति दे दी और अपने पूरे पंचायत को इस कार्य में सहयोग करने के लिए कह दिया ।


नवागांव जनपद पंचायत के पूर्व जनपद सदस्य और वर्तमान जनपद सदस्य प्रतिनिधि धर्मेन्द्र देवांगन का कहना था – हमने अपने पंचायतों में बिल्ला लगाने का काम रोक दिया है । ये लोग हर मकान के पिछे तीस रूपए ले रहे थे । हमे पहले से ही मामला गड़बड़ लगा था । जनपद से पहले आदेश आया कि बिल्ला लगवाएं फिर पता नहीं क्या हुआ कि दूसरा आदेश आया कोई सहयोग ना करें । अधिकारियों को पहले ही ये सब जांच पड़ताल करके आदेश निकालना चाहिए ।
इस संबंध में जब जनपद सीईओ संध्यारानी कुर्रे से जानकारी ली गई तो उनका कहना – एसडीएम आफिस के लेटर के आधार पर आदेश निकाला गया था लेकिन जिला सीईओ के कहने पर उसे निरस्त कर दिया गया । ये कोई बड़ा इश्यू नहीं है ।
बात सहीं है बिल्ला लगाना बड़ा इश्यू नहीं है या आदेश निकलना इश्यू नहीं है लेकिन बिना सोचे समझे और लोगों की जांच पड़ताल किए बिना कार्य करने को आदेश निकालना तो बड़ा इश्यू है ।
कोटा एसडीएम आनंदरूप तिवारी से भी इस बारे में जानकारी चाही गई तो उनका कहना था – बिल्ला लगाने की कोई बाध्यता नहीं है जिसे लगाना है लगाएगा कोई जबरदस्ती नही है । एक लेटर निकला था उसमें स्पष्ट लिखा हुआ था कि जिसको लगाना है वो लगाए जिसको नहीं लगाना है ना लगाए कोई बाध्यता नहीं हैं ।
यहां तक भी बात समझ आ रही है लेकिन ये बात समझ नहीं आ रही कि जब आदेश एकदम इतना ही सरल था तो फिर उसी सरल आदेश को निरस्त करने की क्या जरूरत थी ।

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Sanjeev Shukla DABANG NEWS LIVE Editor in chief 7000322152

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