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उम्मीद – प्रदेश में पंचायत सचिवों की आखरी उम्मीद अंतिम मानसून सत्र से ।

पिछले कई साल से छले जा रहे सचिवों को भरोषा कि भूपेश है तो भरोषा है ।

पड़ोसी राज्य में जितना वेतन रोजगार सहायक को उतना यहां सचिव को ।

दबंग न्यूज लाईव
बुधवार 12.07.2023

रायपुर – छत्तीसगढ़ राज्य बने तेईस साल होने को आ रहे हैं ऐसे में इस प्रदेश में सबसे वंचित कोई वर्ग है तो वो है पंचायत सचिव का । इन तेईस सालों में हर विभाग में नियमितीकरण और वेतन वृद्धि हुई लेकिन पंचायत सचिवों की समस्या की तरफ किसी सरकार ने ध्यान नहीं दिया । ये अलग बात है कि समय समय पर सरकारों ने इनके हित में फैसले लेने की घोषण जरूर की लेकिन अभी तक उस दिशा में कोई फाईल आगे नहीं बढ़ी ।


पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में वहां के मुख्यमंत्री ने रोजगार सहायकों का वेतन नौ हजार से बढ़ाकर सीधे अठारह हजार करने के साथ ही कई अन्य सुविधाएं उनको प्रदान कर दी यदि मध्यप्रदेश के रोजगार सहायको के वेतन और सुविधाओं को देखें तो वो छत्तीसगढ़ के सचिवों से कहीं बेहतर स्थिति में आ गए हैं ।


बहरहाल बात छत्तीसगढ़ की जाए । पिछले 21 सालों से सचिव संघ अपनी सिर्फ एक मांग पर सरकार की मुहर चाहता है वो है नियमितीकरण की । अभी तक सचिवों का शासकीयकरण नहीं हो पाया है जबकि इस बीच शिक्षकों के साथ ही कई अन्य विभाग के कर्मचारी नियमित हो रहे हैं ।


सचिव संघ कई बार हड़ताल पर भी गया लेकिन सरकार के आश्वासन के बाद उसने हड़ताल खत्म कर दी । कुछ माह पूर्व भी प्रदेश सचिव संघ हड़ताल पर था लेकिन विधानसभा के बजट सत्र में उनकी मांग पर ध्यान देने के आश्वासन के बाद उन्होंने हड़ताल खतम कर दी थी । लेकिन उस सत्र में भी उनके साथ अन्याय ही हुआ जबकि कई विभागों की मांगों को माना गया था ।

इन सबके बीच सचिव संघ की अंतिम उम्मीद 18 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र पर टीकी हुई है । सचिव संघ को भरोषा है कि आने वाले सत्र में सरकार उनकी सालों से मांगी जा रही मांग को पूरा करते हुए उन्हें नियमित जरूर करेगी इसलिए सचिव संघ भूपेश है तो भरोषा है के स्लोगन के साथ पुनः सरकार से अपनी एकसूत्रीय मांग को सामने रख रहा है ।

सचिव संघ ने इसी भरोषे के साथ प्रदेश के सभी 90 विधानसभाओं में शासकीयकरण को लेकर अपने विधायकों ,मंडल अध्यक्षों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम 11 जुलाई को ज्ञापन सौंपा है ।

इस संबंध में प्रदेश कार्यालयीन सचिव कमल साहू द्वारा बताया गया कि-“पंचायत सचिव की एक सूत्रीय मांग परिवीक्षा अवधि पश्चात शासकीय करण को लेकर विगत 28 वर्ष से पंचायत सचिव संघर्षरत है। अन्य कर्मचारियों की भांति पंचायत सचिव भी शासकीय कर्मचारी का सौगात पाना चाहते हैं। ज्ञात हो कि पंचायत कर्मी एवं शिक्षाकर्मी की नियुक्ति 1995 में हुआ था एवं पंचायत सचिव की हैसियत से शिक्षा कर्मी वर्ग 3 की नियुक्ति पंचायत सचिव द्वारा किया गया था , शिक्षाकर्मी आज शासकीय हो गया है और पंचायत कर्मी केवल कर्मी रह गया है जबकि 29 विभाग के 200 प्रकार के कार्यों का संचालन सबसे नीचले स्तर पर ग्राम पंचायत में सफलतापूर्वक किया जाता है।

देखना ये होगा कि आने वाले मानसून सत्र में सरकार सचिवों के भविष्य पर क्या निर्णय करती है ।

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