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रविवारीय स्पेशल -चिथरहीन दाई आखिर क्यों पड़ा नाम ? प्रकृति और वास्तु का संगम स्थल कामठी I

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नवमी से ग्यारहवीं शताब्दी के धरोहर दफन है धरती के गर्भ में I

रविवारीय स्पेशल में पढ़ें पंडरिया की पूर्व राजधानी की गाथा

 

रविवारीय स्पेशल में आज घुम आते हैं पंडरिया की पूर्व राजधानी कामठी को । आखिर कामठी में ऐसा क्या था जो ये पंडरिया की राजधानी थी और यहां भव्य मंदिरों और देवालयों का निर्माण हुआ ।

 

दबंग न्यूज लाईव
रविवार 09.01.2022

राजेश श्रीवास्तव 

प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण कामठी नगर पुरातत्व की दृष्टि से काफी समृद्ध है । यहां गोंड वंशी राजाओं द्वारा निर्मित भव्य गढ़ों, मंदिरों , देवालयों के अलावा अति प्राचीन मूर्तियाँ और पुरा वैभव के ध्वंशावशेष यत्र-तत्र बिखरे हुए हैं,

कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड से 20 किलोमीटर उत्तर पूर्व दिशा में आगर नदी के किनारे स्थित है प्राचीन गढ़ कामठी । सघन वनों से आच्छादित यह सुरम्य स्थल शांति और आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है । कामठी नगर पंडरिया राज की पूर्व राजधानी थी । यह स्थान पूर्व में मण्डला राजा संग्राम शाह के बावन गढ़ों में एक था । पंडरिया के पूर्ववर्ती राजा को यह गढ़ उनके सैनिक सहायता के बदले प्रदान किया गया था ।

यह स्थान नवमी से ग्यारहवीं शताब्दी के मध्य गोंड़वंशी कलचुरी राजाओं की भव्य नगरी हुआ करती थी जहां भव्य मंदिर , प्रासाद और वास्तुशिल्प की सुंदर रचना बनी थी । पादरी हिस्लाप , हीरालाल , रशल ,और अनेक विद्वानों ने इस स्थान को भोरमदेव और पचराही के समकालीन माना है । कामठी पूर्व में एक उन्नत राज्य था और यहां गोंड़वंशी शासक राज्य करते थे । इस स्थान में प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि के दिन तीन दिवसीय विशाल मेले का आयोजन होता है जो इस विकासखंड का सबसे वृहद मेला होता है ।


कामठी में गोंड़वंशी राजाओं ने गढ़ के अलावा भव्य मंदिर एवं देवालयों का निर्माण करवाया । यहां से प्राप्त मूर्तियां नवमी से ग्यारहवीं सदी के मध्य की है जो उन्नत किस्म के ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित हैं , यहां की अधिकांश मूर्तियां सेतगंगा मन्दिर में स्थापित है । यहां पर गोंडों के आराध्य भगवान नरसिंह की एक विशाल मूर्ति है जो अपने पंजों में सिंह को दबोचे हुए है । इस मूर्ति को शार्दूल भी कहते हैं । लोग इस मूर्ति के नीचे से लेटकर आरपार होते हैं , लोगों की मान्यता है कि ऐसा करने से उनकी मनोकामना पूरी होती है ।

यहां की अन्य अतिप्राचीन मूर्तियों में हनुमान , कंकाली, ब्रम्हा विष्णु महेश , नृत्यरत गणिका,और यक्ष आदि की मूर्तियां दर्शनीय है । कामठी में एक विशाल शिवमंदिर था जिसके इर्दगिर्द आज भी उसके ध्वंश नक्काशीदार स्तम्भों, शिल्पकलाओं, गवाक्षों और चौकियों के रूप में बिखरे या जमीन में दफन हैं । पुरातात्विक दृष्टि से यह अति महत्वपूर्ण स्थान है , इस स्थान के पुरातात्विक सर्वेक्षण और खुदाई से एक समृद्ध इतिहास सामने आ सकता है । यहां के मेले में दूर दूर से व्यापारी , खेल तमाशे और अनेक मनोरंजन के साधन लेकर लोग आते हैं ।

दुर्गम वनों में निवास करने वाले बैगा जन तथा उनकी स्त्रियां मेले में अपने जरूरत के सामानों की खरीदी बिक्री करते हैं । कामठी मेले में जाने के लिए आपको आगर नदी पार कर जाना होता है , वर्षों से यहां एक उच्चस्तरीय पुल की मांग की जाती रही है जो अब बनना शुरू हुआ है ।

कामठी के आसपास भी अनेक स्थान जनमानस में गहरी श्रद्धा जगाती है जिसमे पर्यटकों को लुभाने वाले अनेक स्थान हैं –

भेड़ागढ़ की गुफाएं – कामठी से चार किलोमीटर उत्तर पूर्व में भेडागढ़ नामक स्थान में पहाड़ के ऊपर प्राकृतिक और कृत्रिम रूप से निर्मित विशाल सुरंगों का जाल बिछा है । इस सुरंग की विशेषता यह है कि इसके प्रवेश के अनेक द्वार हैं लेकिन मुख्य सुरंग तक कोई नही पहुंच पाता ।


बदौरा का शताब्दी वन – कामठी से चार किलोमीटर पूर्व में बदौरा का शताब्दी वन है , इस रमणीक स्थल में शेर, भालू, हिरन,मोर , सेही , सोनकुत्ता जैसे जानवर बहुतायत में हैं । सघन वनों से घिरे होने के कारण यह स्थान अत्यंत ठंडा रहता है । यहां पर एक प्राकृतिक नाला है जो इसी ग्राम से निकलकर इसी ग्राम में लुप्त हो जाता है , स्थानीय जन इसे चितावर कहते हैं ।


चिथरहीन दाई – कामठी जाने के रास्ते मे दस किलोमीटर दूर पहाड़ की घाटी में चिथरहिंन नामक एक सिद्ध स्थान है जहां श्रद्धालु एक इमली के पेड़ में मनौति स्वरूप कपड़े का टुकड़ा बांधते हैं । किवदंती है कि इस स्थान में अंग्रेजो के द्वारा पुल और सड़क का निर्माण किया जा रहा था तब इसी इमली के वृक्ष को काटने की कोशिश की गई जिसमें दो मजदूर तत्काल मर गए , मशीनें टूटने लगी और वह अंग्रेज अफसर बुरी तरह बीमार हो गया ।

तब इस पेड़ को काटने का विचार स्थगित कर दूसरी जगह से मार्ग निकाला गया , अधूरा निर्मित यह पुल आज भी उसी तरह मौजूद है , इस पुल के नीचे अक्सर शेर आराम करता दिख जाता है । वर्तमान में यहां ठहरने का स्थान और अन्य निर्माण कार्य जारी है ।
इस क्षेत्र के घने जंगलों में अनेक पौराणिक और प्राकृतिक स्थल विद्यमान हैं जहां जाने से मन प्रफुल्लित हो जाता है ।

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Sanjeev Shukla DABANG NEWS LIVE Editor in chief 7000322152
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