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सिलपहरी पंचायत पर शौचालय की राशि में गबन करने का आरोप लगया गांव वालों ने ।

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एसबीएम के तहत शौचालय बनवाया गांव वालों से ,बाद में दिए पांच सौ से दो हजार तक की राशि ।
स्वच्छ भारत मिशन की धज्जियां उड़ा रहा पंचायत ।

दबंग न्यूज लाईव
रविवार – 19.07.2020

सुमन पाण्डेय

करगीरोड कोटा – कोटा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाला सिलपहरी पंचायत के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत ने हमसे शौचालय तो बनवा लिया लेकिन अब हजार से दो हजार रूपए ही दे रहा है कई को तो मात्र पांच सौ रूपए देकर हस्ताक्षर करवा लिए है ।
सिलपहरी में एसबीएम के तहत लगभग 220 शौचालयों को निर्माण करवाया गया जिसके लिए बारह हजार के हिसाब से पूरा पैसा पंचायत को प्राप्त हो गया लेकिन पंचायत ने इस पैसों में अपनी नजर गड़ा दी जो पैसे हितग्राहियों को मिलने थे उस पैसे को सरपंच सचिव ने मिलबांट कर ठिकाने लगा दिए ।
यहां के हितग्राहियों का कहना था कि पंचायत से हमे कुछ सामान दिया ही दिया गया और उसके पैसे भी उसकी कीमत से ज्यादा जोड़ा गया । पूरा शौचालय हम लोगों ने अपने पैसों और मेहनत से बनाया मिस्त्री लेकर मटेरियल तक लगाया । पंचायत ने कहा पूरा पैसा मिल जाएगा अब पंचायत किसी को पांच सौ तो किसी को हजार रूपए देकर साईन करवा रही है ।
नगद भुगतान – एसबीएम की राशि का भुगतान हितग्राही के खाते में होना चाहिए लेकिन पंचायत अपना फायदा देखते हुए लोगों को नगद भुगतान कर रही है क्योंकि खाते में पैसे डालने से सभी को पता चलता कि कितना पैसा हितग्राही के खाते में डाले गया है जबकि नगद बांट कर अपनी सूची में कुछ भी राशि पंचायत डाल सकती है ।
पांच सौ रूपए में एक बोरी सिमेंट –पूरे प्रदेश में सिमेंट दो सौ से ढाई सौ रूपए बोरी बिकता है लेकिन सिलपहरी पंचायत ने शौचालय के लिए जो सिमेंट दिया है उसका प्रत्ये बोरी पांच सौ रूपए हितग्राहियों से लिया जा रहा है । हितग्राहियों ने कहा कि पंचायत के द्वारा उन्हें एक बोरी सिमेंट पांच सौ रूपए की दर से दिया गया है । पंचायत ने किसी को दो बोरी सिमेंट तो किसी को तीन बोरी सिमेंट दिया है । किसी को दो तीन नग छड़ तो किसी को गिट्टी दिया है । लेकिन अब हिसाब करते समय जो पैसा हितग्राहियों को मिलना चाहिए वो नहीं दे रहे हैं ।
हितग्राही हरसिंह भानू का कहना था – पंचायत की तरफ से मुझे दो बोरी सिमेंट और छह एमएम के तीन राड दिए गए बस । उसके बाद पूरा शौचालय मैने खुद बनाया । अभी मुझे दो हजार और दे रहे थे मैने कहा इतने में कैसे होगा आप जो सामान दिए हो उसका पैसा काट कर बाकी पैसा मुझे दें ।
एक और हितग्राही रजन सिंह का कहना था साल भर हो गया शौचालय बने दो चार दिन पहले एक हजार रूपए दिए हैं । शौचालय बनाते समय पांच सौ इंट और निचे का बना के दिए बाकी पूरा काम मैं ही किया ।
ऐसे कई हितग्राही हैं जिन्हें पंचायत ने शौचालय का पैसा नहीं दिया है जबकि पंचायत को एसबीएम की राशि बहुत पहले से प्राप्त हो गई है ।
इस बारे में जब पंचायत के सचिव रामकुमार मिश्रा से जानकारी चाही गई तो वे भी कोई जवाब नहीं दे पाए । बरसों से इस पंचायत में डटे हुए सचिव को यही नहीं मालूम कि कितनों को पैसा देना है ? कितने बाकी है और किस हिसाब से पैसा दिया जा रहा है । वो बार बार सरपंच की तरफ देखते । नगद भुगतान क्यों हो रहा पूछने पर उनका कहना था कि पंचायत में किसी के पास खाता नहीं है इसलिए नगद दे रहे हैं । फिर बाद में बोले की निराश्रित की राशि खाते में जाती है ।

अब सोचने वाली बात ये है कि जब गांव में किसी के पास खाता ही नहीं है तो फिर निराश्रित और अन्य राशि कैसे खाते में जाती है । और जब बाकी राशि खाते मे जा सकती है तो शौचालय की राशि खाते में क्यों नहीं जा सकती ? गांव वालों के हिसाब से पंचायत के द्वारा शौचालय की राशि में भारी घालमेल किया गया है किसी को भी सहीं भुगतान नहीं दिया जा रहा है । जिम्मेदार अधिकारियों को चाहिए कि वो सिलपहरी पंचायत में एसबीएम की राशि और वने हुए शौचालयों की जांच करवा कर कार्यवाही करें ।

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Sanjeev Shukla DABANG NEWS LIVE Editor in chief 7000322152
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