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कोटेश्वर की पावनधरा को कोयलेश्वर बनने में नहीं लगेगी देर ।

0.96 मिलीयन टन की क्षमता वाली कोलवाशरी के लिए अनापत्ति की राह देख रहा तिवरता कोल बेनिफिकेशन लिमिटेड ।

दबंग न्यूज लाईव
24 अक्टूबर 2026

कोटा/बिलासपुर -कोटा में मेसर्स तिवरता कोल बेनिफिकेशन प्रा.लि. नगरपालिका से अनापत्ति प्रमाण पत्र के इंतजार में है जैसे ही उसे अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलेगा उसका काम शुरू हो जाएगा और इसके साथ ही कोटेश्वर महादेव की पावन धरा को कोयलेश्वर बनते देर नहीं लगेगी ।


एक जानकारी और पूर्व में दिए गए आवेदन की मानें तो इस साइडिंग में प्रतिवर्ष 0.96 मिलीयन टन क्षमता की कोल वाशरी और कोल साइडिंग लगाने की योजना है । 0.96 मिलीयन टन पढ़ने पर कोई ,खास नहीं लग रहा लेकिन जब इसके अंदर उतरेंगे तो पाएंगे कि 0.96 मिलीयन टन याने नौ लाख साठ हजार मीट्रिक टन और यदि किलोग्राम में समझना हो तो लगभग 96 करोड किलोग्राम की क्षमता ।


यदि इतनी मात्रा में कोयले का ट्रांसपोर्ट किसी बड़े डम्फर या हाइवा से किया जाएगा तो लगभग 32000 ट्रक की आवाजाही और यदि मालगाड़ी का उपयोग किया जाए तो एक मालगाड़ी में लगभग 4000 टन कोयला की क्षमता होती है ऐसे में इतने माल की ढुलाई के लिए लगभग 240 माल गाड़ियों की आवश्यकता होगी ऐसे में समझा जा सकता है कि कोटा में जब इस हिसाब से गाड़ियों की आवाजाही होगी और करोड़ो टन कोयले का लदान होगा तो कितने टन कोयले का डस्ट कोटा की सड़कों , घरों, दुकानों और लोगों के शरीर के अंदर पहुंचेगा इसकी कल्पना ही की जा सकती है ।

ये आकंडे़ डराने के लिए नहीं बल्कि आने वाले भविष्य की तस्वीर बताने और समझाने के लिए है । इस पूरे मामले की शुरूवात सन 2019 से शुरू हुई थी । 2019 में भी तिवरता कोल वाशरी ने नगर पंचायत में एनओसी के लिए एक आवेदन लगाया था और लगभग एनओसी तैयार भी हो गई थी लेकिन शहर के लोगों के विरोध के चलते एनओसी का मामला खटाई में पड़ गया था । अब 2026 में फिर से इसका आवेदन नगरपालिका में आया है और इसके साथ ही फिर से विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं ।

कोटा नगरपालिका का वार्ड क्रमांक 14 और 15 रामनगर और धौराभांठा से लगी कृषि भूमि पर लगभग सत्तर से सौ एकड़ में इस विशाल कोयला साइडिंग और कोलवाशरी की नींव रखने की तैयारी की जा रही है । एक जानकारी के अनुसार कोयले के छोटे कण हवा में कई किलोमीटर की यात्रा कर लेते हैं और जिन्होने भी कोल माइंस या कोल वाशरी के आस पास के आबादी वाले इलाके , पेड़पौधों और पर्यावरण को देखा है वो जानते हैं कि कोयले की डस्ट वहां के वातावरण और इंसानों पर कैसा असर डालती है ।

कोटा को इस कोल साइडिंग या कोल वाशरी से क्या फायदा होगा ये आने वाला कल बताएगा लेकिन इतना तय है कि इससे तयशुदा नुकसान बहुत अधिक होने वाला है । क्षेत्र की कई एकड़ कृषि भूमि बंजर हो जाएगी और साथ ही लोगों के स्वास्थ्य पर इसका काफी विपरीत प्रभाव पड़ेगा ।

सूत्रों की मानें तो कंपनी अभी अपने स्तर पर वो सारे हथकंडे अपना रही है जिससे उसे एनओसी मिलने में दिक्कत ना हो और ज्यादा विरोध ना हो । इसके लिए कंपनी ने अपने कई साइलेंट लोगों को जमीन पर उतार रखा है जो कंपनी के लिए लॉबिंग कर रहे हैं और एनओसी में अड़चन डालने वालों को सेट कर रहे हैं ।

कल ही नगरपालिका के वार्ड 14 के पार्षद ने एनओसी के खिलाफ सामने आकर अपनी आवाज बुलंद की है कि वो एनओसी के विरोध में है और किसी भी हाल में कोल साइडिंग को खुलने नहीं देंगे । देखना होगा आने वाले समय में विरोध के स्वर कितने मजबूत होते हैं और शहर हित में क्या निर्णय होता है । वैसे कंपनी भी अपनी तरफ से कोई कसर छोड़ने वाली नहीं और वो भी उस कंडिशन में जब उसके द्वारा लंबा चौड़ा निवेश इसके लिए किया जा चुका है ।

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