गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के सबसे बड़े सिंचाई परियोजना को मंजूरी ।

मध्यप्रदेश बहकर जाने वाले पानी को रोककर होगा निर्माण ।

311.91 हेक्टेयर भूमि में पानी का भराव I

क्षेत्र की 3730 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी I

दबंग न्यूज लाईव
शनिवार 21.03.2020

पेण्ड्रा – छत्तीसगढ़ से बहकर मध्य प्रदेश जाने वाली सोन नदी के पानी को छत्तीसगढ़ में रोककर उसके पानी से सिंचाई के लिए सोन नदी पर 164.25 करोड़ रुपये की लागत से कोलबिरा मध्यम सिंचाई परियोजना को छत्तीसगढ़ शासन के सिंचाई विभाग के द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री एवं मरवाही के विधायक अजीत जोगी के प्रस्ताव पर बजट में शामिल किया गया है। यह जलाशय गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले का सबसे बड़ा जलाशय होगा जिससे 11 गांवों के 3730 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी। इस जलाशय के बनने से इन गांवों के किसानों की तकदीर बदल जाएगी।

गंगा नदी की प्रमुख सहायक नदी सोन नदी है जिसका उद्गम पेण्ड्रा के पास सोन बचरवार नामक गांव से हुआ है। इस नदी में बहने वाले पानी का अधिकतर भाग मध्य प्रदेश चला जाता है I जल संसाधन संभाग मरवाही द्वारा विस्तृत सर्वे के बाद शासन को इस नदी पर ग्राम कोलबिरा में कोलबिरा मध्यम सिंचाई परियोजना स्वीकृत करने का प्रस्ताव शासन को दिया था जिसके बाद शासन के द्वारा वर्ष 2020-21 के बजट में इस परियोजना के लिए 164.25 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है।  इस जलाशय के सर्वे के लिए 2 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया था जिसके सर्वे के पश्चात सिंचाई विभाग के द्वारा विस्तृत प्राक्कलन बनाकर शासन को प्रस्तुत कर दिया गया है। 

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले की पहली मध्यम परियोजना- कोलबिरा मध्यम परियोजना गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले की पहली मध्यम परियोजना है इसलिए यह इस जिले की सबसे बड़ी जलाशय होगी। इससे पहले इस जिले में जितने भी जलाशय बने हुए हैं वे सभी लघु परियोजनाएं हैं। इस परियोजना से क्षेत्र की 3730 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी I कोलबिरा मध्यम परियोजना के बनने के बाद मरवाही विकासखंड के 11 गांवों बघर्रा, डोंगराटोला, भस्काटोला, बहुटाडोल, पथर्री, जलदा, बदरौड़ी, देवगवां, सचराटोला, खलोटियाटोला, देवरीडांड़ की खरीफ फसल के लिए 3500 एवं रबी फसल के लिए 230 हेक्टेयर सहित कुल 3730 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।

14 परिवार होंगे विस्थापित, निजी भूमि 238.79 तथा 67.62 हेक्टेयर वन भूमि अधिगृहित होगी-कोलबिरा मध्यम परियोजना में खरीफ सीजन में 22 मिली घन मीटर जल का उपयोग किया जायेगा वहीं बांध में जल भंडारण 9.639 मिली घन मीटर रहेगा जिसका कुल डुबान क्षेत्र 311.91 हेक्टेयर भूमि रहेगा। इस जलाशय और 60.15 किलोमीटर नहर निर्माण की लागत 78.64 करोड़ रुपये, जलाशय के लिए 170.91 एवं नहर के लिए 67.88 हेक्टेयर सहित कुल 238.79 हेक्टेयर निजी भूमि अधिग्रहित की जायेगी जिसके लिये 71.63 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाएगा वहीं विस्थापित किये जा रहे 14 परिवारों को विस्थापन एवं पुनर्वास की व्यवस्था के लिए 1.40 करोड़ रुपये तथा बांध व नहर हेतु 67.62 हेक्टेयर वन भूमि के अधिग्रहण के लिये 10.36 करोड़ रुपये तथा अन्य व्यय 2.22 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। इस तरह से बांध की कुल लागत 164.25 करोड़ आएगी।

वन भूमि अधिग्रहण एवं सेंट्रल वाटर कमीशन के अनुमति की प्रक्रिया तेज-कोलबिरा मध्यम परियोजना के निर्माण के लिए सर्वे के पश्चात प्राक्कलन तैयार करने के बाद जलाशय के डुबान एवं नहर निर्माण में आने वाली वनभूमि के अधिग्रहण के साथ ही सेंट्रल वाटर कमीशन से जलाशय निर्माण की अनुमति लेने की प्रक्रिया विभाग के द्वारा तेज गति से प्रारंभ कर दी गई है। इन विभागों से अनुमति मिलते ही जलाशय के निर्माण में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी।

 

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