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प्रदेश के सबसे बड़े अचानकमार टाईगर रिजर्व को डूबोने में जूटे अधिकारी ।

एटीआर के गाईड ड्राईवर हड़ताल पर पर्यटक मायूस ।

दबंग न्यूज लाईव
गुरूवार 28.05.2026

बिलासपुर/कोटा – छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाईगर रिजर्व में यूं तो कागजों पर और अधिकारियों के बयानों के अनुसार सब कुछ ठीक ठाक दिखता है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है । शायद ये देश का पहला टाईगर रिजर्व होगा जहां पीक टाईम में सफारी जिप्सी के गाईड और ड्राईवर हड़ताल पर चले जाएं और अधिकारियों को ना तो इसकी जानकारी हो और ना ही उन्होंने इसके समाधान के लिए कोई कदम उठाए हों । देश के दूसरे टाईगर रिजर्व के लिए ये समय त्यौहार से कम नहीं है जहां हर सत्र में सारी सफारी बुक रहती है और वहां का प्रबंधन पर्यटकों की सुविधाओं का ध्यान रखते हुए लाखों का रेवेन्यू जनरेट कर रहा है ।


पिछले कई सालों से हम जो देखते आ रहे है उससे तो यही लगता है कि अधिकारी खुद नहीं चाहते कि एटीआर में अच्छी सफारी हो और पर्यटक यहां आएं । यहां के प्रबंधन का पूरा ध्यान एटीआर में होने वाले निर्माण कार्य और उसके बजट पर रहता है ।

पिछले तीन दिन से अचानकमार टाईगर रिजर्व के गाईड और ड्राईवर हड़ताल पर चले गए हैं और यहां के फिल्ड डायरेक्टर यू आर गणेशन छुट्टी पर । प्राप्त जानकारी के अनुसार कल यानी बुधवार को एटीआर में तीन जिप्सी की बुकिंग थी लेकिन हड़ताल पर गए कर्मचारियों ने उन्हें जंगल में घुसने नहीं दिया ऐसे में शासद दो जिप्सी को बफर में थोड़ा बहुत घुमा के वापस ले आए बाद में अधिकारियों ने तीनों जिप्सी के पर्यटकों को उनके बुकिंग के पैसे वापस कर दिए ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले चार माह से एटीआर के गाईड और चालकों को वेतन प्राप्त नहीं हुआ है जिसके कारण वे सभी हड़ताल पर चले गए हैं । इस बारे में वर्तमान में एटीआर के प्रभारी डीएफओ अभिनव सिंह से बात हुई तो उनका कहना था – सफारी से कल गाड़ियां वापस हो गई इसकी जानकारी उन्हें नहीं है शायद गर्मी और डिहाईड्रेशन के कारण कुछ लोगों की तबीयत खराब है अब ऐसे में तो उन्हें काम के लिए कहा नहीं जा सकता । जब उनसे गाईड एवं ड्राईवरों के हड़ताल के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कुछ ईश्यू होंगे इसकी जानकारी मुझे नहीं है वैसे फंड आ गया है जल्द ही वेतन भुगतान हो जाएगा ।

बहरहाल प्रदेश के अचानकमार टाईगर रिजर्व के लिए ये विडबंना ही है कि यहां पर्यटन को लेकर कोई विशेष कार्य होते दिखाई नहीं दे रहेे हैं क्योंकि हर समय यहां आए पर्यटक प्रबध्ंान के रवैये से निराश और मायूस होकर वापस होते हैं कहीं ऐसा ना हो कि यहां पर्यटकों को आना ही बंद हो जाए इसलिए समय रहते कोई ऐसी ठोस नीति बनानी चाहिए जिससे ये टाईगर रिजर्व भी मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के टाईगर रिजर्व की बराबरी करने लगे ।

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