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बेलगहना के शक्तिबहरा और बाबापारा में बाघ की दस्तक, वन्यप्रेमियों में उत्साह तो ग्रामीणों में बढ़ी चिंता ।

सुरक्षा और जागरूकता के लिए पंचायत ने कराई मुनादी ।

                   वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के रवैये से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त ।

दबंग न्यूज लाईव
गुरूवार 01.10.2026

बेलगहना। मैकल पर्वत श्रेणियों से घिरा बेलगहना अंचल एक बार फिर वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर चर्चा में है। घने साल एवं मिश्रित वनों, अरपा नदी की जलधारा तथा आसपास फैले छोटे-बड़े नालों और जलस्रोतों के कारण यह क्षेत्र लंबे समय से जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। अब क्षेत्र के शक्तिबहरा और बाबापारा में बाघ के पगमार्क दिखाई देने की सूचना से जहां वन्यजीव एवं प्रकृति प्रेमियों में उत्साह है, वहीं जंगल से लगे गांवों के ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ गई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, 30 सितंबर 2026 को शक्तिबहरा के जंगल क्षेत्र में बाघ के ताजे पगमार्क देखे गए। इसके ठीक अगले दिन 1 अक्टूबर 2026 को बाबापारा क्षेत्र में बेलगहना निवासी संतोष यादव के घर के समीप खेत की गीली मिट्टी में बाघ के पदचिह्न दिखाई दिए। मिट्टी में पंजों के निशान स्पष्ट दिखाई देने की बात सामने आने के बाद आसपास के ग्रामीणों में बाघ की मौजूदगी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

बेलगहना और आसपास के जंगलों में पहले से ही तेंदुआ, भालू, जंगली सूअर, चीतल सहित अनेक वन्यजीवों की मौजूदगी देखी जाती रही है। ऐसे में बाघ का आवागमन इस क्षेत्र के वन पारिस्थितिकी तंत्र की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घने जंगल, पर्याप्त जलस्रोत और वन्यजीवों के लिए अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियां बाघ सहित बड़े वन्यजीवों के आवागमन के लिए उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराती हैं।

पगमार्क मिलने की सूचना के बाद स्थानीय वन अमले के कर्मचारियों द्वारा मौके पर पहुंचकर स्थिति देखने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बाघ की गतिविधियों को लेकर उच्च स्तर पर वैज्ञानिक निगरानी और नियमित गश्त की आवश्यकता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्षेत्र में एक ही बाघ का आवागमन है अथवा एक से अधिक बाघ यहां सक्रिय हैं। इसी तरह बाघ अकेला है या उसके साथ शावक हैं, इसकी पुष्टि भी वैज्ञानिक निगरानी के बिना नहीं की जा सकती।

इसी को लेकर वन्यप्रेमियों और ग्रामीणों की निगाह अब वन विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाने, नियमित गश्त बढ़ाने, पगमार्क की वैज्ञानिक जांच कराने तथा बाघ की गतिविधियों के मार्ग का पता लगाने की मांग की जा रही है। इससे न केवल बाघ की वास्तविक गतिविधियों की जानकारी मिल सकेगी, बल्कि यह भी पता लगाया जा सकेगा कि वह किन क्षेत्रों में नियमित रूप से विचरण कर रहा है।

ग्रामीणों की सुरक्षा का विषय भी इससे जुड़ा हुआ है। जंगल से लगे गांवों के अनेक लोग रोजमर्रा के कार्यों, खेती और अन्य आवश्यक गतिविधियों के लिए जंगल तथा खेतों के आसपास जाते हैं। ऐसे में वन विभाग द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में ग्रामीणों को सावधान करने, आवश्यक होने पर मुनादी कराने तथा बाघ की गतिविधियों से संबंधित विश्वसनीय जानकारी समय पर उपलब्ध कराने की जरूरत महसूस की जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बेलगहना क्षेत्र अचानकमार टाइगर रिजर्व के प्रभाव क्षेत्र से जुड़ा हुआ है और वन्यजीवों के आवागमन का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इसलिए यहां वन्यजीवों की निगरानी के लिए मैदानी स्तर पर वन अमले की सक्रियता और अधिकारियों की नियमित मौजूदगी महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों ने संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी निगरानी व्यवस्था विकसित करने तथा कुरदर के जंगल क्षेत्रों में अचानकमार टाइगर रिजर्व की स्थायी चौकी अथवा कार्यालय व्यवस्था को मजबूत करने की मांग भी उठाई है।

वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बाघ की मौजूदगी को केवल रोमांच या कौतूहल के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यदि बाघ इस क्षेत्र में नियमित रूप से विचरण कर रहा है तो उसके प्राकृतिक आवास, भोजन-पानी के स्रोत और पारंपरिक आवागमन मार्गों को सुरक्षित रखना भी जरूरी होगा। इसके साथ ही अवैध शिकार और जंगल में अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है।

बेलगहना के शक्तिबहरा और बाबापारा में लगातार दो दिनों में बाघ के पगमार्क मिलने की सूचना ने एक ओर जहां मैकल अंचल की समृद्ध वन्यजीव संपदा को फिर सामने ला दिया है, वहीं मानव-वन्यजीव सुरक्षा और विभागीय निगरानी को लेकर कई सवाल भी खड़े किए हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि बाघ की मौजूदगी की वैज्ञानिक तरीके से पुष्टि और निगरानी की जाए तथा ग्रामीणों को समय रहते आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी जाए। इससे बाघ की सुरक्षा के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानव और वन्यजीव के बीच बेहतर सह-अस्तित्व की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकेगा।

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