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पेसा एक्ट -क्या है ग्राम पंचायतों के अधिकार , और कैसे काम करता है ये एक्ट ?

दबंग न्यूज लाईव
मंगलवार 23.12.2025

Sanjeev Shukla
बिलासपुर- यूं तो भारत में पंचायती राज व्यवस्था की शुरूवात 02 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने की थी लेकिन 1992 में संविधान में 73 वें संशोधन के बाद इसे संवैधानिक दर्जा मिला और फिर पूरे भारत में त्रि स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का स्वरूप सामने आया । लेकिन इसके बाद भी विशेष अनुसुचित क्षेत्र के पंचायतों के अधिकारों में कुछ कमी सी रह गई थी ।

पंचायतों को और अधिक सशक्त बनाने के लिए अनुसुचित क्षेत्रों के पंचायतों में 24 दिसम्बर 1996 को PANCHAYAT EXTANSION TO THE SEHEDULED AREAS ACT 1996 यानी पेसा ( PESA ) एक्ट लाया गया । इस एक्ट के तहत अनुसुचित क्षेत्र के पंचायतों को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए । पेसा एक्ट का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों को ग्राम सभाओं के माध्यम से स्वशासन की शक्ति देना और प्राकृतिक संसाधनों पर उनके अधिकारों की रक्षा करना था, ताकि उन्हें शोषण से बचाया जा सके।

ग्राम पंचायतों को ग्राम सभा की शक्ति प्रदान की गई जिसके तहत सामाजिक-आर्थिक विकास की योजनाओं को मंजूरी देने और लाभार्थियों की पहचान करने का अधिकार , प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण , लघु वनोपज, लघु खनिज, और लघु जल निकायों जैसे संसाधनों पर ग्राम सभा को नियंत्रण प्राप्त हुआ साथ ही भूमि अधिकार और भूमि संबंधी मामलों में निर्णय लेने का भी अधिकार प्राप्त हुआ ।

यह अधिनियम आदिवासी समुदायों को विकास की प्रक्रिया में शामिल करता है और उन्हें अपने मामलों पर नियंत्रण देता है, जिससे वे शोषण से बच सकें और अपने संसाधनों का प्रबंधन कर सकें ।
छत्तीसगढ़ गठन के बाईस साल बाद सात जुलाई 2022 को कैबिनेट में इसे मंजूरी दी गई और 9 अगस्त 2022 में इसके नियम लागू हुए इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में पेसा एक्ट क्रियाशील हो गया । बिलासपुर जिले के कोटा , तखतपुर ,मस्तुरी तथा बिल्हा विकासखंडों के कुुछ आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायतों में पेसा एक्ट लागू है ।

बिलासपुर जिले का कोटा विकासखंड चूंकि आदिवासी बाहुल्य विकासखंड है एक जानकारी के मुताबिक यहां के लगभग सत्तर से अधिक ग्राम पंचायतों में पेसा एक्ट लागू है । लेकिन इस कानून के बाद भी सवाल ये उठता है कि क्या वाकई में इस कानून के बाद ग्राम पंचायतों की ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव को सर्वोपरी मान लिया जाता है ? और क्या यहां पारित प्रस्ताव के आधार पर ही वनों और खनीज संपदाओं के मामलों में कार्य होते हैं ?

बहरहाल पेसा एक्ट ग्राम पंचायतों को शक्ति प्रदान करता है कि वो अपने ग्राम पंचायत के संबंध में निर्णय ले सकें और अपनी बेहतरी के प्रस्ताव ग्राम सभा से पारित कर सकें जरूरत है इस कानून के व्यापक प्रचार प्रसार और पंचायतों को इसके बारे में और अधिक जानकारी देने की । फिलहाल तो पेसा एक्ट के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कल इस एक्ट की महत्ता को समझें और अपने अधिकार जानें ।

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