
दबंग न्यूज लाईव
बुधवार 16.09.2026
कोटा – कोटा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत नेवसा में 15 वें वित्त की राशि में आर्थिक अनियमितता की उच्च स्तर पर शिकायत के बाद दबाव में आते हुए जिला पंचायत ने जनपद पंचायत को पूरे मामले की जांच करने के लिए पत्र लिखा । जिले से जांच संबंधी पत्र आने के बाद कोटा जनपद पंचायत ने एक दो सदस्यी जांच टीम बना दी जिसमें एक इंजिनियर और एक वरिष्ठ करारोपण अधिकारी को इस पूरे मामले में जाचं करते हुए प्रतिवेदन देने के लिए कहा गया ।
जांच टीम में शामिल वरिष्ठ लेखा अधिकारी जागेश्वर चतुर्वेदानी और इंजिनियर पटेरिया ने 18 अगस्त 26 को पंचायत जाकर पूरे मामले की जांच की तो पता चला कि सचिव ने 15 वें वित्त की राशि से लगभग 15 काम ऐसे बताएं है जो पंचायत में हुए ही नहीं है । जांच टीम ने पंचायत के सभी रिकार्डो की जाचं की तो पता चला कि सचिव लव जायसवाल ने ग्राम पंचायत में जो काम होना बताते हुए लाखों की राशि निकाली है वो काम तो पंचायत में हुए ही नहीं है ।
जांच टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट में पंचनामा कराते हुए 15 कामों की सूची बनाते हुए साफ साफ लिखा है कि पंचायत में उक्त काम होना नहीं पाया गया और शिकायत सही हैं । जांच टीम ने पंचनामा जो लिखा है वो इस प्रकार है –आज 25.08.2026 को उल्लेखित कार्यों का हमारे समक्ष निरीक्षण किया गया उपरोक्त कार्यों का कार्य स्थल पर कार्य होना नहीं पाया गया । अतः उक्त शिकायत सहीं पाई गई ।’’
अब सवाल यहीं से उठता है जांच टीम ने जो जांच रिपोर्ट बनाई उसे उसी प्रकार से जनपद में जमा करना चाहिए और उस जांच रिपोर्ट पर क्या कार्यवाही करनी है ये उच्च अधिकारियों पर छोड़ना चाहिए । लेकिन जांच टीम ने आठ पेज की जो रिपोर्ट जनपद सीईओ को सौंपी है उसमें निष्कर्ष के तौर पर लिखा है कि ‘‘ ग्राम पंचायत नेवसा का कैशबुक का निरीक्षण वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक किया गया है । जिसमें शिकायतकर्ता के द्वारा उक्त कार्याें में आपत्ति भी दर्ज कराई गई है चूंकि ग्राम पंचायत नेवसा में स्वयं ग्राम पंचायत एजेंसी अतिरिक्त भी कार्य हुआ है इस हेतु तात्कालिन सचिव को पत्र जारी कर अपना स्पष्टीकरण देने हेतु लेख किया जाना उचित होगा ।‘‘
जांच रिपोर्ट और जांच प्रतिवेदन दोनों को देखने से इतना तो पता चलता है कि जांच टीम ने बड़ी सफाई से पूरे मामले में लिपापोती करने की तैयारी कर ली है । इस जांच प्रतिवेदन से जांच टीम ही शक के दायरे में आ रही है और कई सवाल इसके बाद उठ रहे हैं जिसका जवाब उच्च अधिकारियों को देना चाहिए ।
क्या जांच टीम को अपने उच्च अधिकारियों को क्या कार्यवाही करनी है ये सलाह देना उचित है ? जांच टीम का काम सिर्फ जांच करके जांच प्रतिवेदन को अपने कार्यालय में जमा करवाना है तो फिर जांच टीम क्यों स्पष्टीकरण की सलाह दे रही ? क्या जांच टीम ने तत्कालीन सचिव का बयान पूरे मामले में नहीं लिया ? यदि नहीं लिया तो क्यों नहीं लिया जबकि तत्कालीन सचिव के बयान के बिना पूरी जांच ही अधुरी है ? और यदि तत्कालीन सचिव का बयान लिया गया है तो फिर जांच प्रतिवेदन में सचिव का बयान क्यों संलग्न नहीं है ? पंचायतों की जब आडिट होती है तो आडिटर क्या आडिट करता है ? क्या आडिटर को ये सब गड़बड़ी दिखाई नहीं देती ? और यदि गड़बड़ी रहती है तो आडिटर क्या करता है ? पिछले पांच सालों में क्या यहां के करारोपण अधिकारी , पंचायत इंस्पेक्टर और सीईओ को इतना समय नहीं रहता कि अपने पंचायतों की जांच कर ले ? आखिर उच्च अधिकारी पंचायतों का दौरा क्यों करते हैं ?
ये ऐसे सवाल हैं जो इस जांच और जांच प्रतिवेदन के बाद लोगों के दिमाग में उठेंगे । शिकायतकर्ता ने इस जांच प्रतिवेदन के बाद बताया कि उसने फिर से सीएम पोर्टल पर इसकी शिकायत कर दी है । देखना है इस पूरे मामले में क्या कार्यवाही होती है ।



