कोटा के गजब बीएमओ एक साथ एक ही टाईम पर करते हैं एमएलसी और पीएम दोनों।
कोटा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की हालत खराब ,वार्ड से लेकर अस्पताल परिसर में अव्यवस्था ।

दबंग न्यूज लाईव
शनिवार 22.08.2026
कोटा – कोटा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र आईसीयू में चले गया है । अस्पताल के परिसर से लेकर वार्ड तक की स्थिति काफी खराब है जबकि यहां बीएमओ और बीपीएम दोनों बैठते हैं लेकिन कैसे इनको ये सब नहीं दिखता पता नहीं या हो सकता है इनके द्वारा देख के भी अनदेखा किया जा रहा हो ।

वार्ड में मरीजों के लिए मच्छर दानी तो टंगाई गई है लेकिन देख कर लगता नहीं कि ये किसी सीएचसी का वार्ड है । नायलोन की रस्सी से एक बेड से दूसरे बेड तक और फिर उसी के सहारे तीसरे बेड तक के मच्छरदानी को टंगा दिया गया है । जीवन दीप समिति के फंड का उपयोग आखिर बीपीएम और बीएमओ कहां कर रहे हैं पता नहीं जबकि इस फंड का उपयोग करके वो वार्ड और परिसर को बेहतर बना सकते हैं लेकिन बात वही आकर रूक जाती है कि हमें क्या करना है ।

इस बीच कोटा बीएमओ गुप्ता का एक आडियो रिकार्ड बेलगहना क्षेत्र के एक क्षेत्रिय पत्रकार ने भेजा है पूरा मामला कल का बताया जा रहा है पीड़ित दिलीप सोनवानी जो बेलगहना क्षेत्र में पत्रकारिता भी करते हैं अपनी समस्या के लिए कोटा बीएमओ को काल करते हैं लेकिन कोटा बीएमओ उसकी बात को सुनने की बजाए उस पर फायर हो जाते हैं और उसकी पढ़ाई लिखाई से लेकर पत्रकारिता तक की जानकारी हासिल कर लेते हैं ।
जिसमें बीएमओ निखलेश गुप्ता गुप्ता उससे किस लहजे में बात कर रहे हैं ये सुना जा सकता है । रिकार्डिग सुनने के बाद आप खुद समझिए कि क्या एक डाक्टर को इस तरह से बात करनी चाहिए । बीएमओ साहब दुसरे तरफ के व्यक्ति पर फायर होते हुए कहते हैं कि पत्रकार साहब बार बार फोन मत करो , कहां के पत्रकार हो कितने साल हो गए पत्रकारिता करते । फिर झल्लाते हुए कहते हैं कि बेकार फोन मत करो अभी मैं पीएम कर रहा फिर तुरंत कहते हैं वो एमएलसी कर रहे हैं । अब समझ ये नहीं आया कि डाक्टर साहब एक ही टाईम पर जीवित आदमी का एमएलसी और मृत व्यक्ति का पीएम कैसे कर रहे थे ।
इस पूरे मामले में कोटा बीएमओ से बात की गई तो उनका कहना था – मैं अस्पताल में था और एक जरूरी केस देख रहा था इस बीच बार बार उनका काल आ रहा था और मैं उनको जानता भी नहीं था इसलिए ऐसा पेनिक हो गया ।
इतनी ही जागरूकता बीएमओ क्षेत्र के झोला छाप डाक्टरों की कुंडली निकालने में और अस्पताल के परिसर और वार्ड को सुधारने में लगा लेते तो शायद लोगों का भला हो जाता खैर आप बीएमओ साहब की बात सुनिए और खुद फैसला कीजिए कि क्या एक जिम्मेदार बीएमओ का ये व्यवहार सहीं है ।



