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गणेश विसर्जन के पहले डीजे के शोर पर लगाना होगा प्रशासन को लगाम ।

क्या है हाईकोर्ट की गाईड लाईन और कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 2026 ?

दबंग न्यूज लाईव
रविवार 20.09.2026

बिलासपुर – देश और प्रदेश में अब त्यौहारों का वो सीजन आ गया है जब सबसे ज्यादा डीजे का शोर होता है और लोगों को इससे स्वास्थगत समस्याओं से जुझना होता है । प्रदेश में डीजे की तेज आवाज से हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज की शिकायतें भी सामने आई है । विशेषज्ञों के अनुसार, 50 से 70 डेसिबल से ज्यादा का शोर शरीर में स्ट्रेस हार्माेन (एड्रेनालाईन) को बढ़ा देता है। इससे अचानक ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट अत्यधिक बढ़ जाता है, जिससे कमजोर नसों वाले लोगों को हार्ट अटैक या ब्रेन हेमरेज का गंभीर खतरा होता है। बलरामपुर क्षेत्र में 2024 में गणेश विसर्जन के दौरान डीजे के अत्यधिक तेज शोर के कारण एक व्यक्ति के सिर की नस फट गई थी, जिससे उसे गंभीर ब्रेन हेमरेज हुआ और उसकी मौत हो गई थी।


छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भी डीजे की तेज आवाज को लेकर सख्त नाराजगी जाहिर की है । इसके बाद प्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 2026 के तहत तेज आवाज में डीजे, लाउडस्पीकर और अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग को लेकर सख्त नियम बनाने की तैयारी में है। प्रस्तावित नियमों के तहत सार्वजनिक स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग के लिए जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त या सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना, कारावास और उपकरण जब्त करने जैसे प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि नया कानून बनने की प्रक्रिया के दौरान भी पुलिस और प्रशासन को शांत नहीं बैठना है और वर्तमान नियमों के तहत उल्लंघन करने वालों पर तुरंत एफआईआर और जब्ती की सख्त कार्रवाई करनी है।

प्रस्तावित कानून में अस्पताल, नर्सिंग होम, शैक्षणिक संस्थान, छात्रावास, न्यायालय, केंद्र एवं राज्य सरकार के कार्यालयों तथा स्थानीय निकायों के परिसरों के आसपास 100 मीटर की परिधि को ‘शांत क्षेत्र’ (साइलेंस जोन) के रूप में परिभाषित किया गया है। प्रारूप में सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक को ‘दिन का समय’ और रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक को ‘रात्रि का समय’ माना गया है। शांत क्षेत्रों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग को लेकर अधिक कड़े नियम प्रस्तावित किए गए हैं।

प्रस्तावित अधिनियम के अनुसार, पहली बार नियमों का उल्लंघन करने पर कारावास या न्यूनतम 50 हजार रुपये का जुर्माना, अथवा दोनों का प्रावधान रखा गया है। यदि उल्लंघन शांत क्षेत्र में किया जाता है, तो सजा एक वर्ष तक और न्यूनतम जुर्माना 75 हजार रुपये तक हो सकता है। दोबारा नियम तोड़ने पर तीन महीने से एक वर्ष तक की सजा और न्यूनतम एक लाख रुपये जुर्माने का प्रस्ताव है। वहीं, यदि पुनरावृत्ति शांत क्षेत्र में होती है, तो छह महीने से दो वर्ष तक की सजा और न्यूनतम डेढ़ लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। साथ ही ध्वनि उपकरण आपूर्तिकर्ता का पंजीयन स्थायी रूप से निरस्त करने का विकल्प भी प्रस्ताव में शामिल किया गया है।

प्रदेश में गाहे बगाहे डीजे संचालकों पर कार्यवाही होते रही है जिसके बाद डीजे संचालक प्रशासन से अनुमति लेकर डीजे का संचालन करते हैं लेकिन सिर्फ अनुमति मिल जाने से डीजे संचालक को तयशुदा डीसेबल से ज्यादा में डीजे बजाने का हक नहीं मिल जाता है । ऐसे में प्रशासन को डीजे के तेज शोर से आम लोगों को राहत दिलाने के बारे में कड़ाई से कार्यवाही करनी होगी ।

संजीव शुक्ला पिछले 20 सालों से पत्रकारिकता कर रहे हैं इन्होंने गुरूघासीदास विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में पी.जी. और पं.सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है । संजीव शुक्ला प्रदेश के कई अखबारों और चैनलों के साथ काम कर चुके हैं ।

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