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जर्जर स्कूल भवन से बच्चों की जान को खतरा, ग्रामीणों ने जड़ा ताला ।

बच्चों ने जर्जर भवन में प्रवेश के बजाय बाहर बैठकर पढ़ने को दी प्राथमिकता, आंदोलन में बच्चे भी हुए शामिल ।

अधिकारियों को बार-बार सूचना के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश, बीईओ की अनुपस्थिति पर उठे सवाल ?

दबंग न्यूज लाईव
मंगलवार 29.09.2026

कोटा /लूफा – छत्तीसगढ़ में शिक्षा और स्कूलों का क्या हाल है ये किसी को बताने की जरूरत नहीं है । सरकार चाहे लाख दावे करें कि शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन काम हो रहा है लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि सरकार की सूची में शिक्षा शायद है ही नहीं या हो भी तो शायद सबसे नीचले क्रम में और इसलिए ना तो यहां के स्कूलों की स्थिति पर और ना ही यहां बच्चे कैसे पढ़ रहे हैं इसकी चिंता  सरकार करती है और ना ही उसके जिम्मेदार अधिकारी । कोटा विकासखंड के लूफा ग्रामपंचायत से आई ये तस्वीर शिक्षा और स्कूलों की दशा पर कई सवाल खड़े करती है ।


ग्राम पंचायत लूफा के आश्रित ग्राम लहंगाभाठा स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला का जर्जर भवन अब बच्चों और ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। भवन की छत से प्लास्टर गिर रहा है, दीवारों में जगह-जगह दरारें हैं और बारिश के दौरान कक्षाओं के भीतर पानी टपकने की स्थिति बनी रहती है। ऐसी परिस्थितियों में बच्चों को भवन के भीतर बैठाकर पढ़ाना जोखिमपूर्ण होने की आशंका के चलते ग्रामीणों ने सोमवार को स्कूल भवन में बच्चों के प्रवेश पर रोक लगाते हुए तालाबंदी कर दी।


ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन की जर्जर स्थिति के संबंध में विकासखंड शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है। सुशासन तिहार के दौरान भी इस समस्या को प्रमुखता से उठाया गया था। इसके बावजूद भवन की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती गई।


बच्चों ने कहा बाहर बैठकर पढ़ेंगे, लेकिन जर्जर भवन में नहीं- विरोध प्रदर्शन के दौरान बच्चे भी ग्रामीणों के साथ शामिल रहे। बच्चों ने जर्जर भवन के अंदर बैठने के बजाय बाहर बैठकर पढ़ाई करने को प्राथमिकता दी। ग्रामीणों का कहना था कि जब भवन की स्थिति इतनी खराब है और छत एवं दीवारों से लगातार खतरा बना हुआ है, तो बच्चों को जोखिम में डालकर कक्षाएं संचालित करना उचित नहीं है।
ग्रामीणों ने कहा कि वे अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे। बार-बार निवेदन और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने के कारण आखिरकार उन्हें स्कूल में बच्चों के प्रवेश पर अंकुश लगाने जैसा कदम उठाना पड़ा।


इतनी गंभीर घटना की जानकारी के बावजूद बीईओ की अनुपस्थिति पर सवाल ?
तालाबंदी और ग्रामीणों के विरोध की सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने के बाद भी विकासखंड शिक्षा अधिकारी के मौके पर उपस्थित नहीं होने को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए। ग्रामीणों ने कहा कि जब मामला सीधे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा हो और स्कूल में तालाबंदी जैसी स्थिति निर्मित हो गई हो, तब संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारी की मौके पर उपस्थिति अपेक्षित थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में मौजूद रहे, लेकिन मौके पर स्वयं पहुंचने के बजाय सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं शैक्षिक समन्वयक प्रमोद शुक्ला को भेजा गया। ग्रामीणों ने इसे गंभीर प्रशासनिक उदासीनता का विषय बताते हुए शासन स्तर पर इसकी जांच और जिम्मेदारी निर्धारित करने की मांग की है।

प्रशासनिक जिम्मेदारी वाले अधिकारी के स्थान पर शैक्षिक समन्वयक को भेजने पर भी उठे सवाल-ग्रामीणों ने मौके पर अधिकारियों के पहुंचने को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि स्कूल भवन की जर्जर स्थिति, सुरक्षा और भवन संबंधी कार्रवाई मूलतः प्रशासनिक एवं विभागीय जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है। ऐसे में केवल अकादमिक कार्यक्षेत्र से जुड़े शैक्षिक समन्वयक को जांच अथवा स्थिति देखने के लिए भेजना प्रशासनिक गंभीरता और जिम्मेदारी के निर्वहन पर प्रश्न खड़े करता है।


ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि इस पूरे मामले में यह भी जांच की जाए कि जर्जर भवन की शिकायतों के बाद अब तक किस स्तर पर कार्रवाई लंबित रही और संबंधित अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन क्यों नहीं किया।

आश्वासन के बाद फिलहाल समाप्त हुआ विरोध-मौके पर पहुंचे सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं शैक्षिक समन्वयक प्रमोद शुक्ला ने ग्रामीणों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं। अधिकारियों ने जल्द ही भवन का निरीक्षण कराने तथा मरम्मत अथवा नवीन भवन के संबंध में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और अधिकारियों द्वारा कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल तालाबंदी और विरोध समाप्त कर दिया।

हालांकि ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द ही जर्जर भवन की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे दोबारा आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
शासन से कड़ी कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने शासन और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े ऐसे संवेदनशील मामलों में लापरवाही या शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी विभागीय कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराना चाहिए और भवन की वास्तविक स्थिति के आधार पर मरम्मत, वैकल्पिक व्यवस्था अथवा नवीन भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। बच्चों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है और प्रशासन को इसे केवल आश्वासन तक सीमित न रखकर धरातल पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

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