शिक्षा विभाग में लगी आरटीआई तो तिलमिलाए संकूल समन्वयकों ने कर दी पुलिस में शिकायत ।
शिक्षकों को कम से कम अपनी तो मर्यादा बनाए रखनी चाहिए ।

दबंग न्यूज लाईव
शनिवार 25.07.2026
कोटा/बिलापसपुर – शिक्षक अब गुरू तो रहे नहीं इसलिए अब समाज भी उनसे ये अपेक्षा नहीं रखता कि वो बच्चों को गुरूओं की तरह तराशें । अब शिक्षक सिर्फ शिक्षक ही रह गया है याने समाज अब चाहता है कि शिक्षक बच्चों को बेहतर ढंग से सहीं सहीं शिक्षा दे दे यही बहुत है । लेकिन जब शिक्षक ही आधी अधुरी जानकारी रखेगा और वर्तमान परिवेश में खुद को जागरूक नहीं रखेगा तो कैसे बच्चों को उचित शिक्षा और मार्गदर्शन देगा ?
केन्द्र सरकार ने 2005 में सूचना का अधिकार कानून लाया जिसके तहत एक आम आदमी भी सरकारी कार्यालय से अपनी जरूरत के हिसाब से जानकारी ले सकता था । ऐसी जानकारी जो 2005 के पहले मिलना मुश्किल थी इस कानून के आने के बाद उपलब्ध होने लगी । इस कानून के द्वारा ही देश में कई भ्रष्टाचार के कारनामें उजागर हुए हैं और सरकारी अधिकारियों की तानाशाही सामने आई है ।
लेकिन कोटा विकास खंड के लगभग 40 से 45 संकुल समन्वयकों को ये नहीं पता कि इस कानून के तहत यदि कोई सूचना मांगी जाती है तो उसका उत्तर निर्धारित समय में आवेदक को देना अनिवार्य है ना कि पुलिस में शिकायत करना । संकूल समन्वयकों को यदि आरटीआई के आवेदकों से दिक्कत है और यदि आवेदक उन्हें गलत नियत से परेशान कर रहे हैं तो वे सारे सबूतों के साथ इनके खिलाफ शिकायत कर सकते हैं ।
ताजा मामला कोटा विकासखंड के बेलगहना क्षेत्र के 45 शिक्षकों के एक गु्रप का सामने आया है जिसमें शिक्षकों द्वारा पत्रकारों के खिलाफ एस पी कार्यालय में एक शिकायत की गई है जिसमें शिक्षकों नें आरोप लगाया है कि क्षेत्र के पांच पत्रकार सूचना का अधिकार लगाकर जानकारी मांगते हैं और अवैध वसूली के लिए दबाव बनाते हैं साथ ही उच्च कार्यालय में शिकायत की धमकी दी जाती है ।
अब सवाल ये उठता है कि क्या पत्रकार के द्वारा स्कूल , वहां की स्थिति , स्कूल के फंड के उपयोग और शिक्षकों के स्कूल आने जाने के संबंध में जानकारी मांगना अपराध है ?
शिकायत में नाम आए एक पत्रकार ने कहा कि अगर शिक्षक सही हैं तो सूचना के तहत मांगी गई जानकारी देने से क्यों डर रहे आवेदक को जानकारी उपलब्ध करा देते ? जानकारी तो हमने बीईओ कार्यालय से मांगी है सीधे संकूल समन्वयकों से तो जानकारी भी नहीं मांगी गई है उन्हें जवाब बीईओ कार्यालय में देना चाहिए था ।
पत्रकारों ने कहा कि इस पूरे मामले में कानूनी कार्यवाही के लिए जानकारी ली जा रही है और सभी 45 शिक्षकों के खिलाफ मानहानी का केस दर्ज करवाया जाएगा ताकि कोई भी पत्रकारों पर झुठे आरोप लगाकर उन्हें बदनाम ना करें । यदि शिक्षकों के पास किसी पत्रकार के विरूद्ध कोई सबूत है तो उसे पेश करें ।
इस पूरे मामले से ब्लाक के सभी पत्रकार काफी नाराज हैं और उन्होंने अब इन 45 संकूल समन्यवकों की पूरी जानकारी जैसे इनकी मूल पदस्थापना किस स्कूल में है ? इनके संकूलों के अंतर्गत कितने स्कूल आते हैं ? स्कूलों की और संकूल समन्वयकों के आफिस की क्या स्थिति है ? साथ ही संकूल समन्वयक अपने मूल स्कूल में कितना समय देते हैं जैसे बिन्दुओं पर अब जानकारी मांगने की तैयारी कर रहे हैं ।



