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कोटा में पिछले कई सालों से जमे खाद्य विभाग के एक अधिकारी पर पूरा सिस्टम महेरबान ।

कोटा से तीन माह मेें तीन खाद्य नीरिक्षक लेकिन एएफओ कई सालों से एक ही ।

कोटा के हर धान मंडियों से निकल रहा घोटाले का जिन्न ।

दबंग न्यूज लाईव
शुक्रवार 22.04.2022

कोटा/बिलासपुर – कोटा विकासखंड में पिछले तीन माह में तीन खाद्य नीरिक्षक आए और गए लेकिन यहां सालों से एक उच्च अधिकारी पर पूरा सिस्टम महेरबान है । पिछले तीन माह में श्याम वस्त्रकार , अजय मौर्य का यहां से स्थानान्तरण हुआ और अब मस्तुरी कांड से चर्चा में आई खादय नीरिक्षक प्रिती चौबे कोे यहां का जिम्मा दिया गया है । लेकिन यहां सालों से जमे एएफओ  पर पूरा सिस्टम इतना महेरबान है कि ये सालों से यहां जमे हुए है ।

फाईल फोटो चपोरा मंडी ।

हम ये मामला इसलिए बता रहे हैं कि हाल ही में नगचुई धान मंडी और अब चपोरा धान मंडी में लाखों के घोटाले का जो प्रकरण सामने आया है उसने धान मंडियो में हो रहे काले पीले को उजागर कर दिया है । इन मंडियो में जांच और नीरिक्षण करने का जिम्मा भी कहीं न कहीं इन अधिकारियों पर भी था ।

फाईल फोटो चपोरा मंडी ।

कोटा विकासखंड में धान खरीदी में जिस प्रकार की गड़बड़ी होती है वो किसी से छुपी नहीं है । ताजा मामला नगचुई धान खरीदी केन्द्र का भी सामने आया है जहां आपरेटर और वहां के कर्मचारियों ने लाखों रूपए का गबन कर लिया बाद में जांच के बाद उन पर एफआईआर दर्ज हुई । हमने कई माह पहले ही चपोरा धान मंडी में हो रही गड़बड़ी को उजागर किया था लेकिन वहां कोई कार्यवाही नहीं हुई थी । नगचुई में कुछ छोटे कर्मचारियों पर कार्यवाही हुई लेकिन क्या सिर्फ इस कार्यवाही को ही इस मामले में पूरा न्याय मान लिया जाए । इन मंडियों के निरीक्षण का जिम्मा जिन अधिकारियों पर होता है आखिर उनसे कोई सवाल क्यों नहीं किया जाता ।

फाईल फोटो चपोरा मंडी ।

धान मंडी की जांच और वहां के कर्मचारियों पर कार्यवाही के बाद सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि उन जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही क्यों नहीं होती जिन पर इन मंडीयों की जांच और निरीक्षण की जिम्मेदारी होती है ? और इन्हें क्यों बचा लिया जाता है ? कोटा में धान मंडियों की समय समय पर जांच करने की जिम्मेदार खाद्य विभाग के एएफओ अशोक सवन्नी की भी थी और इन्होंने यहां की जांच भी की होगी ? ऐसे में ये सवाल इनसे भी पूछा जाना चाहिए कि आखिर इतनी बड़ी गड़बड़ी नगचुई धान मंडी में होती रही और इन्हें कैसे मालूम नहीं हुआ ? ये धान मंडी क्या देखने जाते थे ? और ये भी देखा जाए कि इन्होंने यहां के नीरिक्षण पंजी में क्या सलाह मंडी के बेहतरी के ली दी ?


लेकिन ये सवाल पूछने वाला कोई नहीं है । कोटा में पिछले तीन माह में तीन खाद्य अधिकारियों के ट्रांसफर हो गए लेकिन एएफओ सवन्नी पिछले कई सालों से कोटा में अपना साम्राज्य जमाए बैठे हैं उनके कार्यकाल के समय मंडियों से लेकर उचित मूल्यों की दुकानों के कई मामले सामने आए , कार्यवाही भी हुई लेकिन सिर्फ छोटे लोगों पर किसी भी जांच में उच्च अधिकारी से ये नहीं पूछा गया कि आपके रहते ,आपने क्या देखा और क्या कार्यवाही की ।

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