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नवागांव सल्का की सोसायटी से पिछले छह माह से उचित राशन वितरण नहीं करने का आरोप ।

जनपद सदस्य ने कलेक्टर एवं एसडीएम से की शिकायत । खादय नीरिक्षक ने कहा जांच की जाएगी ।

दबंग न्यूज लाईव
गुरूवार 07.08.2026

कोटा – कोटा खाद्य विभाग पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए गए हैं । कोटा से मात्र 6 किमी दूर नवागांव सल्का के राशन दुकान संचालक पर पिछले छह माह से उचित मात्रा में राशन वितरण नहीं करने के आरोप वहां के जनपद सदस्य ने लगाए हैं और इसकी लिखित शिकायत कलेक्टर और एसडीएम कोटा से की है ।


प्राप्त जानकारी के अनुसार सल्का नवागांव के जनपद सदस्य धर्मेन्द्र देवांगन ने वहां के राशन वितरण केन्द्र के संचालक पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक पत्र कलेक्टर और एसडीएम को दिया है । पत्र के अनुसार पिछले छह माह से यहां के संचालक ने गांव वालों को पर्याप्त मात्रा में राशन का वितरण नहीं किया है । वितरण केन्द्र के संचालक पर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जूलाई माह में सिर्फ बीस प्रतिशत हितग्राहियों को ही राशन का वितरण किया गया है जबकि अस्सी प्रतिशत हितग्राहियों के राशन हितग्राहियों को नहीं बांटा गया है और उसका गबन कर लिया गया है । जबकि पिछले छह माह से सिर्फ पचास प्रतिशत हितग्राहियों को ही राशन का वितरण किया जा रहा है ।


जनपद सदस्य ने अपने पत्र में राशन दुकान संचालक के विरूद्ध छह बिंदुओं में जांच करते हुए कार्यवाही करने के लिए कहा है । जनपद सदस्य ने कहा है कि राशन दुकान की पिछले छह माह के राशन के आय व्यय और वितरण की जांच की जाए ,उपभोक्ताओं के जिस राशन का गबन किया गया है उसका वितरण उपभोक्ताओं को किया जाए ,साथ ही जुलाई माह में गबन किए गए 80 प्रतिशत राशन का भी वितरण किया जाए और राशन दुकान संचालक पर कठोर कार्यवाही की जाए ।


फिलहाल कोटा विकास खंड में राशन में गडबड़ी का ये कोई पहला मामला नहीं है इसके पहले भी कई सौ क्विंटल चना ,शक्कर और चावंल के घोटाले सामने आ चुके हैं । देखना होगा इस शिकायत के बाद विभाग क्या कार्यवाही करता है या फिर पहले की तरह ही लीपापोती करते हुए मामले को ठंडे बस्ते में डाल देता है क्योंकि अनाज के इस घपलेबाजी में सिर्फ संचालक ही तो नहीं रहता और भी हिस्सेदार रहते हैं ।
इस मामले में खाद निरीक्षक आशीष दीवान से बात की गई तो उनका कहना था -शिकायत की जानकारी मिली है कल जाकर जांच की जाएगी ।

मतलब पिछले छह माह से विभाग को इसकी जानकारी ही नहीं है जब आन रोड दुकानों का ये हाल है तो फिर अंदरूनी दुकानों की क्या स्थिति होगी सोचा जा सकता है । ऐसे में ये सवाल उठने लाजमी है कि क्या  जब कोई शिकायत होगी तभी विभाग जांच करेगा ? क्या विभाग को समय समय पर अपने वितरण केन्द्रो की जांच नहीं करनी चाहिए ? यदि गांव वाले शिकायत नहीं करेंगे तो क्या वितरण केन्द्र वाले ऐसी ही गड़बड़ी करते रहेंगे ? बहरहाल अब देखना होगा इस पूरे मामले की कैसी जांच होती है और क्या कार्यवाही होती है ।

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