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स्कूल खेलों में सेजस के बच्चे नहीं ले सकते भाग । अधिकारियों की मनमर्जी ।

ये कैसा नियम ? क्या सेजस सरकारी खेल कैलेण्डर से बाहर है ।
जिला शिक्षा अधिकारी ने दिया गोल मोल जवाब ।

दबंग न्यूज लाईव
मंगलवार 02.08.2022

बिलासपुर – सरकार ने स्कूलों का खेल कैलण्डर जारी कर दिया है जिसके आधार पर स्कूलों में खेल आयोजित हो रहे हैं । लेकिन इन खेलों से सेजस के बच्चों को दूर रखा गया है और यहां के बच्चे किसी भी खेल में भाग नहीं ले रहे हैं । सरकार द्वारा मिनी ,जुनियर और सिनियर लेबल पर जिला ,संभाग और राज्य स्तरों पर खेलों का आयोजन किया जाता है जहां से खेल प्रतिभा निकलकर बाहर आती है । यही छोटे बच्चे आगे चलकर प्रदेश और देश का नाम रोशन करते हैं लेकिन जब बच्चों में इस प्रकार का अंतर कर दिया जाएगा तो कैसे कोई खेल में आगे बढ़ पाएगा ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बिलासपुर जिले में स्कूल खेलों से सेजस के बच्चों के भाग लेने पर पाबंदी लगा दी गई है । जबकि शासन से ऐसा कोई भी आदेश नहीं आया है कि सेजस के बच्चे स्कूली खेलों में भाग नहीं ले सकते ।


बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी कौशिक से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने भी पूरे मामले में गोल मोल जवाब दे दिया । यहां तक कि उनके पास भी राज्य सरकार का कोई नोटिफिकेशन नहीं है कि सेजस के बच्चों को स्कूल खेलों में शामिल नहीं होने देना है । जिला शिक्षा अधिकारी ने सिर्फ इस आधार पर सेजस को इन खेलों से अलग कर दिया है कि सेजस के खेल अलग से होंगे ।


ये समझ के बाहर है कि सेजस के खेल क्यों अलग होंगे ? सेजस के खेल कैलण्डर उसी समय क्यों जारी नहीं किया गया जब स्कूल खेलों के कैलेण्डर जारी हुए ? क्या सरकार सेजस के लिए अलग से खेल कैलेण्डर जारी करेगी ? यदि खिलाड़ी दोनों खेलों में भाग ले ले तो क्या दिक्कत है ? वैसे भी पिछले साल सेजस के बच्चों ने स्कूली खेलों में भाग लिया था ।

बिलासपुर डीईओ का कहना था – अभी तक सेजस का खेल कैलेण्डर जारी नहीं हुआ है और कोई नोटिफिकेशन नहीं आया है । पिछले साल सेजस के खेल अलग हुए थे इसलिए इस बार भी वैसा ही होगा । जब उनसे ये पूछा गया कि यदि खिलाड़ी दोनों आयोजनों में भाग ले ले तो क्या दिक्कत है ? इसका जवाब उन्होंने दिया कि क्या बच्चे साल भर खेलते ही रहेंगे ।


अब इनको कौन समझाए कि स्कूल खेल साल भर तो चलता नहीं है ? और चलता भी हो तो हर खेल तो चलता नहीं । सभी खेलों के अलग अलग शेडयूल बने रहते हैं और एक ही खिलाड़ी सभी खेल तो नहीं खेलता ।

यदि डीईओ को सेजस के बच्चों के पढ़ाई की इतनी ही चिंता है तो यहां की पढ़ाई व्यवस्था ही ठीक कर देते । खैर इस व्यवस्था से ये तो समझ आ गया कि हमारे देश के खिलाड़ी शुरू से ही ऐसे अधिकारियों के रवैये से दम तोड़ते रहते हैं । और हम खिलाड़ियों को दोष देते हैं कि उनका प्रदर्शन उच्च स्तरों पर बेहतर नहीं होता ।

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