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शिवतराई में कुत्तों के हमले से चीतल घायल हुआ तो एसडीओ ने कहा रात भर रिसार्ट में रख दो ।

ये एटीआर है ..ऐसे लापरवाह अधिकारियों के भरोषे हैं एटीआर के वन्य जीव ।

शिवतराई में चीतल पर टुट पड़े कुत्ते , जानकारी के बाद भी अधिकारियों को परवाह नहीं ।
एसडीओ का कहना -गाड़ी और पूरी रेस्क्यू टीम मौके पर मौजूद जबकि मौके पर सिर्फ एक डिप्टी रेंक के अधिकारी ।

दबंग न्यूज लाईव
रविवार 02.07.2023

Sanjeev Shukla/ Suraj Gupta

शिवतराई/कोटा – अचानकमार टाइगर रिजर्व अपनी अव्यवस्थाओं को लेकर हमेशा से चर्चा में रहा है । यहां के अधिकारी अपने कर्तव्यों के प्रति कितने जिम्मेदार हैं ये कल रात समझ में आ गया जब एक घायल चीतल की सुध लेने में अधिकारियों को कई घंटे लग गए ।

दबंग न्यूज लाईव को रात लगभग ग्यारह बजे शिवतराई से एक सूचना प्राप्त हुई कि एक व्यस्क चीतल पर गांव के ही कुछ कुत्तों ने हमला कर दिया है और चीतल काफी गंभीर रूप से घायल हो गया है । इस जानकारी के बाद हमने एटीआर के डीएफओ विष्णु राज को काल किया लेकिन घंटी जाती रही साहब ने काल रिसिव नहीं किया । इसके बाद कोटा बफर के रेंजर अजय शर्मा को काल किया गया लेकिन उनका मोबाईल स्वीच आफ आया इसके बाद यहां के एसडीओ संजय लुथर से सम्पर्क हो पाया और उन्हें जानकारी दी गई तो उनका कहना था कि जानकारी प्राप्त हो गई है और हमारी पूरी रेसक्यू टीम घटना स्थल पर पहुंच गया है और उसे  कानन लेकर आया जा रहा है ।


जबकि ये सरासर झुठ था जानकारी के बाद भी डेढ़ घंटे तक ना तो एटीआर का कोई अधिकारी और ना ही कोई कर्मचारी घटना स्थल पहुंचा था । एक बार फिर एसडीओ से बात हुई तो उनका फिर से वहीं कहना था हमारे डिप्टी रेंजर द्विवेदी जी गाड़ी लेकर पहुंच गए हैं और रेसक्यू कर लिया गया है हमें भी चिंता है । मैं खुद दो मिनट पहले वहां से गुजरा हूं ।

एसडीओ की ये बात फिर से झुठी निकली जब डिप्टी रेंजर द्विवेदी से बात की गई । डिप्टी रेंजर का कहना था कि “मैं अकेला ही यहां हूं गाड़ी शिवतराई रिसार्ट में खड़ी है लेकिन कोई ड्राईवर नहीं है ऐसे में कानन ले जाना मुश्किल है और अभी ले भी गए तो वहां कोैन मिलेगा । साहब से बात हुई है उनका कहना है कि  उसे शिवतराई रिसार्ट ले जाएं और रात भर वहीं रखे सुबह कानन पेंडारी ले आना ।”

घटना स्थल पर जानकारी के बाद भी देर से पहुंचने का कारण पूछने पर पता चला कि विभाग के बड़े सीसीएफ साहब पास के ही एक रिसार्ट में रूके हुए थे और बाकी अधिकारी उनकी आवभगत में लगे थे । सही भी है अधिकारी की सेवा करेंगे तब तो मेवा खाने मिलेगा वन्य जीव की सेवा से क्या मिल जाएगा ?

अधिकारियों की इस लापरवाही को देखने जब दबंग न्यूज लाईव की टीम रात में ही शिवतराई पहुंची तो इस बात की जानकारी अधिकारियों को भी हो गई और आनन फानन में रिसार्ट से एक गाड़ी को लाया गया और लकड़ियों के सहारे घायल चीतल को गाड़ी में चढ़ाया गया और कानन ले जाया गया । हद तो ये हो गई कि इस गाड़ी को भी विभाग का कोई कर्मचारी नहीं गांव का एक युवक चलाते हुए कानन ले गया ।

रात सवा बजे जब ये खबर लिखी जा रही थी तब पता चला कि कानन में भी किसी प्रकार की प्राथमिक चिकित्सा उस चीतल को नहीं मिल पाई है क्योकि वहां भी कोई चिकित्सीय स्टाफ नहीं था । मतलब आज की रात चीतल को अपने भाग्य के सहारे ही काटनी होगी ।

अचानकमार टाईगर रिजर्व को टाईगर रिजर्व तो बना दिया गया है लेकिन टाईगर रिजर्व में जो सुविधाएं होनी चाहिए वो यहां है ही नहीं । यहां ऐसे आपातकालीन समय के लिए एक वेटनरी हास्पीटल और डाक्टर के साथ ही स्टाफ की व्यवस्था होनी चाहिए क्योंकि यहां से कानन जाने में ही डेढ से दो घंटे का समय लग जाता है । लेकिन एटीआर के अधिकारी वन्य जीवों के लिए हास्पीटल की जगह हाईटेक बैरियर बनाने में लगे हैं । एटीआर के शिवतराई में जब यहां के अधिकारियों के आवास हैं तो फिर ये अधिकारी बिलासपुर में क्यों रहते हैं ? आखिर कब ये लापरवाह अधिकारी वन्य जीवों और जंगल के प्रति संवेदनशील होंगे और अपनी जिम्मेदारी को बेहतर ढंग से निभाएंगे जिससे एटीआर वाकई में एक बेहतरीन टाईगर रिजर्व बन सके ।

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